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उदगम portal me kavitaaye ,lekh ,chintan aadi ko sthaan diya jaayega mae svyam ek kavi ,hu mujhe padhane ,likhane ,ghumane ka shauk hae mera nam kishor kumar khorendra haeआगे पढ़ें... 

चुपचाप रेल सा गुजर जाता हूँ
तुम्हारे लिये मैं हूँ पथ में आने वाले वृक्ष अनेक तुम बढ़ जाती हो आगे जिनकी छायाओं को न देख ... kishorkumarkhorendra द्वारा 19 सितंबर, 2011 2:05:00 PM IST पर पोस्टेड
जड़ हुए चेतन
वर्षा के जल से भींगें आतूर हो नदिया तलाश रही वृहत आलम्बन टूटे हुए किनारों में निहित प्रेम का ... kishorkumarkhorendra द्वारा 19 सितंबर, 2011 2:00:00 PM IST पर पोस्टेड
तुमसे पूछ कर
तुमसे जुड़े होते हैं मेरे सारे पल मैं कर लिया करता हूँ मन ही मन तुमसे पूछ कर अपने सारे ... kishorkumarkhorendra द्वारा 19 सितंबर, 2011 1:54:00 PM IST पर पोस्टेड
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